भाला फेंक पर निबंध | Essay on javelin throw in hindi | Rules, History & Awards of Javelin throw in hindi 2022 | Neeraj Chopra

भाला फेंक पर निबंध | Essay on javelin throw in hindi | Rules, History & Awards of Javelin throw in hindi 2022

 भाला फेंक पर निबंध | Essay on javelin throw in hindi | Rules, History & Awards of Javelin throw in hindi 2022


जैवलिन थ्रो क्या है? 

जैवलिन थ्रो यानी भाला फेंक एक ओलिंपिक खेल है. यह एक ट्रैक और फील्ड इवेंट है. यह एक आउटडोर खेल है. इसमें पुरुषों के भाले का वजन कम से कम 800 ग्राम और लंबाई 2.6 मीटर और 2.7 मीटर के बीच होती है. वहीं महिलाओं के भाला का वजन कम से कम 600 ग्राम और लंबाई 2.2 मीटर और 2.3 मीटर के बीच होती है. थ्रो को उस बिंदु से मापा जाता है जहां टिप पहले जमीन से टकराती है. एक वीडियो में नीरज ने बताया कि गेम्स के दौरान यह नियम है कि सभी खिलाड़ी अपने पर्सनल जैवलिन को एक साथ रखते हैं. उसको सभी थ्रोअर इस्तेमाल कर सकते हैं. 

भाले का आकार 

वजन- पुरुष खिलाड़ी के लिए लिए भाले का वजन 800 ग्राम होता है. वहीं महिला खिलाड़ी के लिए 600 ग्राम का भाला होता है. 

लंबाई- पुरुष के लिए 2.6 और 2.7 मीटर (8 फीट 6 इंच और 8 फीट 10 इंच), जबकि महिला के लिए 2.2 और 2.3 मीटर. 

भाला फेंक खेल के नियम 

भाला फेंकते समय उसको कंधे के ऊपर से फेंका जाता है. आप भाला फेंकने से पहले भाला फेंकने वाली दिशा में पीठ नहीं कर सकते. अगर भाला फेंकते समय मैदान के छोर या सिरों पर बनी रेखा (जिसे स्क्रैच लाइन भी कहा जाता है) को खिलाड़ी के शरीर का कोई भी हिस्सा छू लेता है, तो इसे खेल का उल्लंघन माना जाता है. इस खेल में सही थ्रो वो ही माना जाता है, जिसमें भाले का सिरा जमीन में घुस जाए या भाला जमीन पर खड़ा रहे. खेल के दौरान खिलाड़ी को तीन बार भाला फेंकने का मौका दिया जाता है. ज्यादा दूर फेंकने वाला जीत जाता है. साथ ही अगर भाला फेंकते समय भाले का छोर टूट जाए या भाला खंडित हो जाए तो कोशिश विफल मानी जाती है. भाला फेंकने का तरीका एक थ्रोअर भाले को कंधे के ऊपर (सिर के करीब) उठाकर रन-अप की शुरुआत करता है, जिसमें नुकीले धातु के सिरे को थ्रो की दिशा में फेंकते हैं. साथ ही इस पोल को पकड़ने के लिए एक ग्रिप भी होती है. 30 मीटर से 36.50 मीटर लंबा और 4 मीटर चौड़े रनवे पर एथलीट दौड़ता है. थ्रो के दौरान एथलीट किसी भी समय रनवे से बाहर नहीं जा सकता है. एथलीट अपनी सुविधानुसार भाले को तीन प्रकार से पकड़ सकता है. अमेरिकी पकड़, फिनिश पकड़ और वी पकड़. तीनों ही पकड़ में उंगलियों और भाले की स्थिति अलग होती है. आमतौर पर एथलीट के स्ट्रेट रन-अप में 10 से 15 कदम की दूरी होती है, इसके बाद तीन से चार क्रॉसओवर कदम आगे बढ़ता है, इस दौरान एथलीट दौड़ना जारी रखता है लेकिन एथलीट तिरछा चलते हुए सही दिशा में भाला फेंकता है. खेल के नियम के अनुसार, एथलीट को फाउल लाइन को पार नहीं करना चाहिए. यह वह लाइन है, जिससे दूरी को नापा जाता है. एथलीट रन-अप और थ्रो के दौरान जिस ताकत से भाला फेंकते हैं, उसे भाला फेंकते ही काबू करना मुश्किल होता है. 

इस खेल का इतिहास 

एक खेल के रूप में भाला फेंक को शिकार और लड़ाई में भाले के उपयोग से लिया गया है. पुरुषों के लिए यह खेल 1908 से और महिलाओं के लिए 1932 से, यह ओलिंपिक खेलों का हिस्सा रहा है. पुरुषों के लिए भाला फेंक का नियम साल 1986 में संशोधित किया गया था. भाला फेंक को जब खेलों में शामिल किया गया तबसे लेकर आज तक इसकी तकनीक में कई परिवर्तन हुए हैं. शुरुआत में स्वीडन तकनीक होती थी जिसमें तीन कदम दौड़कर भाला पत्थर की तरह फेंका जाता था. उस समय भाले पर डोरी नहीं लपेटी जाती थी. 1920 से 1932 तक पोलिश तकनीक प्रयोग की गयी जिसमें दौड़ते समय भाला कंधे पर रहता था और शरीर पूरी तरह कमान की भांति तन जाता था. 

वर्ल्ड रिकॉर्ड 

भाला फेंक का वर्ल्ड रिकॉर्ड (Javelin Throw World Record) जैन जेलेगनी के नाम है, जिन्होंने जर्मनी में जेस्स मीटिंग इवेंट में 98.48 मीटर की दूरी तक भाला फेंका था. इससे पहले पुराने नियमों के अनुसार, 1984 में उवे हॉन ने 104.8 मीटर दूर भाला फेंक वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था. उवे हॉन ने पुराने भाले से यह रिकॉर्ड कायम किया था. 1986 में नए डिजाइन के भाले से इवेंट होने लगे. नए डिजाइन के भाले के साथ वर्ल्ड रिकॉर्ड अब चेकोस्लोवाकिया के खिलाड़ी जैन जेलेगनी के नाम है, जिन्होंने जर्मनी में जेस्स मीटिंग इवेंट में 98.48 मीटर की दूरी तक भाला फेंका था. यह कारनामा जेन ने 1996 में किया था.एक आउटडोर तथा ओलंपिक खेल के रूप में भाला फेंक का प्राचीन काल से व्यापक अस्तित्व मौजूद रहा है। पहले लोग शिकार आदि के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया करते हैं। लेकिन इसकी लोकप्रियता ने इसे एक बेहतरीन अन्तर्राष्ट्रीय खेल के रूप में परिवर्तित कर दिया। जिससे आज विभिन्न देशों द्वारा भाला फेंक खेल को जेवलिन थ्रो के नाम से जाना जाता है। 

आज हम आपके लिए इस लेख के माध्यम से भाला फ़ेंक अथवा जेवलिन थ्रो खेल पर निबंध लेकर प्रस्तुत हुए हैं। इस निबंध के माध्यम से आपको भाला फेंक खेल की महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त होंगी। 

“भाला फेंक खेल पर निबंध” 

प्रस्तावना

भाला फेंक एक ओलंपिक खेल है। जिसमें एक भाला उपकरण का प्रयोग किया जाता है। भाला लकड़ी का बना होता है और इसके आगे का हिस्सा नुकीला होता है। इसे हल्की धातु से बनाया जाता है ताकि खेल के दौरान इसे अधिक दूर तक फेंका जा सके। इसके साथ ही भाला फेंक एक ट्रैक इवेंट अथवा आयोजन के रूप में भी। जिसमें दौड़ना, कूदना तथा फेंकना जैसे एथलीट शामिल किए जाते हैं। भाला फेंक पुरुष इवेंट को डिकैथलॉन कहा जाता है तथा वहीं भाला फेंक महिला इवेंट को हेप्टाथलॉन का नाम दिया जाता है। भाला फेंक खेल का इतिहास: प्राचीन ग्रीस में भाला फेंक की तकनीक व्यापक रूप से प्रचलित रही है। धीरे धीरे यह तकनीक सामान्य गतिविधि से आगे बढ़कर खेल के रूप में परिवर्तित हो गई। 708 ईसापूर्व में इस खेल को पेंटाथलॉन हिस्से के रूप में ओलंपिक खेलों में शामिल किया गया। जिसमें पुरुषों तथा महिलाओं दोनों घटकों को सम्मिलित किया गया। पुरुषों के लिए 1908 से भाला फेंक खेल की शुरुआत की गई। जिसमें 1986 में संशोधित करके गुरुत्वाकर्षण के क्षेत्र को चार सेमी आगे स्थांतरित कर दिया गया। 1932 में भाला फेंक महिलाओं के लिए शुरू किया है। कुछ समय पश्चात् 1999 में महिलाओं के भाला फेंक खेल के लिए संशोधन किया गया था। इतिहास में चेक एथलीट जॉन जेलेजनी को सबसे बड़ा पुरुष भाला फेंकने वाला माना जाता है। उन्होंने 98.90 मीटर का विश्व रिकॉर्ड बनाया था। इसके अतिरिक्त बाराबोरा स्पॉटकोवा, को इतिहास की बेहतरीन भाला फेंकने वाली स्त्रियों में से एक माना जाता है। उन्होंने 72.28 मीटर के साथ सर्वश्रेष्ठ भाला फेंकने वाली महिला का विश्व रिकॉर्ड बनाया। 

भाला फेंक के नियम:-

 • भाला फेंक के खेल नियम IAAF द्वारा तय किए जाते है। इसके अन्तर्गत भाले का वजन, आकर, और गुरुत्वाकर्षण का केंद्र IAAF नियमों द्वारा परिभाषित किया जाता है। 

• भाला फेंक खेल में खिलाड़ी को भाला फेंक की दिशा की ओर पीठ करने से मना किया जाता है।

 • भाला फेंक खेल में भाला पकड़ से पकड़ना चाहिए। इसे खिलाड़ी की ऊपरी बांह के कंधे पर फेकना चाहिए। 

• भाला फेंक खेल को तभी वैधता प्राप्त होती है जब निश्चित खेल क्षेत्र के भीतर भाला फेंका जाता है। 

• खेल के दौरान स्क्रैच लाइन यानि कि गलत रेखा को पार नहीं करना चाहिए। 

• किसी प्रतियोगिता के दौरान तीन से छह बार तक भाला फेंकने का नियम बनाया जाता है। 

• इस खेल के ऑल राउंड में सबसे लंबा सिंगल लीगल थ्रो वाला खिलाड़ी विजेता माना जाता है। 

• नियमों के मुताबिक, पुरुषों के लिए भाले का वजन 800 ग्राम तथा महिलाओं के लिए 600 ग्राम तय किया गया है। • इसके अतिरिक्त भाले की लंबाई पुरुषों के लिए 2.6 व 2.7 मीटर तथा महिलाओं के लिए भाले की लंबाई 2.2 व 2.3 मीटर निर्धारित की गई है। 

भाला फेंक के मशहूर खिलाड़ी: 

भाला फेंक खेल में एथलीट्स ने अपनी मेहनत तथा सफल प्रयास से अपने अपने स्तर पर सफल रिकॉर्ड बनाए। जिनमें से जोहासिन वेटर, शिवपाल सिंह, अरशद नदीम, जूलियस येगो, जैन जेलेजनी, एंडरसन पीटर्स, गोटिक्स चेक्स तथा केशोर्न वाल्कॉट आदि। हाल ही में ओलंपिक खेलों में आयोजित जेवलिन थ्रो खेल में भारत के नीरज चोपड़ा ने गोल्ड मेडल प्राप्त किया। जिससे भारत देश के भाला फेंक खेल के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया। 

निष्कर्ष:

 देश के युवा एथलीट खेलों में अधिक रुचि रखने के साथ साथ सफल प्रयास कर अपना लक्ष्य प्राप्त भी करते हैं। भाला फेंक अथवा जेवलिन थ्रो जैसे खेल ऐसे खेल हैं जो खिलाड़ी के करियर को स्पष्ट रूप से निखार सकते हैं। इसका बेहतरीन उदाहरण जेवलिन थ्रो गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा हैं।

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1 comment:

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